"हमारा समाज तभी सही मायनों में विकसित कहलाएगा, जब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी शिक्षा, सम्मान और अवसर की समानता मिलेगी। आइए, डॉ. अम्बेडकर के सपनों का भारत बनाएं।"
प्रिय साथियों और देशवासियों,
जय भीम! डॉ. अम्बेडकर सोशल फाउंडेशन ऑफ इनोवेशन (DASFI) की स्थापना केवल एक संगठन के रूप में नहीं, बल्कि एक 'समता ज्ञानोदय मिशन' के रूप में की गई है। मेरे जीवन का यह व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि शिक्षा के अभाव में प्रतिभाएं कैसे दम तोड़ देती हैं और अवसर न मिलने पर समाज का एक बड़ा वर्ग कैसे पीछे छूट जाता है।
बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा था, "शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा, वह दहाड़ेगा।" इसी मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए हमने DASFI की नींव रखी। हमारा मुख्य लक्ष्य समाज के उन वंचित, शोषित बच्चों और युवाओं तक पहुंचना है, जिनके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आज भी एक सपना है। हम विशेष रूप से बालिकाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हम नवाचार (Innovation) और कौशल विकास (Skill Development) के माध्यम से युवाओं को न केवल साक्षर बना रहे हैं, बल्कि उन्हें रोजगार और नेतृत्व के लिए भी तैयार कर रहे हैं।
"Pay back to society" (समाज को वापस लौटाएं) — यह मेरा आप सभी से आह्वान है। अगर आप आज सक्षम हैं, तो उस समाज की मदद के लिए आगे आएं जिसने आपको यहाँ तक पहुँचाया है। यह यात्रा अकेले तय नहीं की जा सकती। मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि इस मिशन से जुड़ें, अपना समय, ज्ञान या आर्थिक सहयोग दें और इस सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा बनें।
समता और न्याय के इस महायज्ञ में आपके सहयोग की अपेक्षा है। धन्यवाद!